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लोकसभा आम चुनाव की तैयारियों में संगठन को पूरी तरह से ढालने के लिये विशेष दिशा-निर्देश

बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट के वरिष्ठ पदाधिकारियों व जिम्मेदार कार्यकर्ताओं की अहम बैठक में पार्टी प्रमुख सुश्री मायावती जी द्वारा सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के कार्य की गहन समीक्षा के साथ-साथ  लोकसभा आम चुनाव की तैयारियों में संगठन को पूरी तरह से ढालने के लिये विशेष दिशा-निर्देश।

साथ ही उत्तर प्रदेश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व शासन में भी हिंसा, भय व आतंक का बुरा माहौल हर स्तर पर व्याप्त है जिससे सर्वसमाज के मेहनतकश लोगों व व्यापारियों आदि का भी जीवन काफी ज्यादा असुरक्षित हो गया है।

 

प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी व गरीबी भी, कानून-व्यवस्था की तरह ही, पूरी तरह से बिलकुल ही बेकाबू है। बीजेपी के नेतागण अब मुहँ छिपाये फिर रहे हैं। सत्ता में आ जाने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को अब उत्तर प्रदेश की चिंता नही सताती है। उनका ज्यादा समय विपक्ष को कोसते रहने में ही बीतता है।

 

जबकि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की भगवा सरकार अपने नेताओं पर से गंभीर आपराधिक मुकदमें की वापसी को ही असली जनसेवा व सही देशभक्ति समझ बैठी है और इसी गलत काम में ही पूरी तरह से व्यस्त है जो अति दुर्भाग्यपूर्ण।

 

देश व प्रदेश की जनता नोटबन्दी के अपरिपक्व फ़ैसले व जी.एस.टी. के नये कर कानून की आर्थिक जख्मों से कराह रही है, फिर भी बीजेपी की सरकारें अनगिनत हवा-हवाई दावों से उनके जख्मों पर नमक छिड़कने से बाज नही आ रही है।

 

शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी मुहैया कराने की ईमानदार कोशिश करने की बजाय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सरकार उन्हें चाय व पकौड़ा बेचने के लिये ही मजबूर करना चाहती है और इसी लिये केवल ऐसे ही लोगों की गुणगान में लगातार लगी रहती है। क्या ऐसे ही भारत आगे बढ़ेगा व आयुष्मान होगा? बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी।

 

लख़नऊ, 10 फ़रवरी 2018 :

 

बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट के समस्त पदाधिकारियों व जिम्मेदार वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की आज यहाँ 12 मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी राज्य कार्यकाल में एक अहम बैठक हुई जिसमें पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष,  उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी ने खासतौर से शिरकत की। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश में ज़मीनी स्तर पर संघठन की तैयारियों, कैडर बैठकों के आयोजन आदि

के साथ-साथ सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने सम्बंधी अनवरत् जारी रहने वाली गतिविधियों की गहन समीक्षा की तथा पार्टी को आगामी लोकसभा आमचुनाव की तैयारियों में ढालने के लिये जरूरी विशेष दिशा-निर्देश भी दिये।

 

सुश्री मायावती जी ने इस बैठक में  खासतौर से उत्तर प्रदेश के बिगड़ते हुये राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व आपराधिक माहौल आदि पर फीडबैक प्राप्त किया और पाया कि बीजेपी के वर्तमान शासनकाल में भी हिंसा, भय, आतंक का ऐसा माहौल हर स्तर पर व्याप्त है जिससे कि सर्वसमाज के मेहनतकश लोगों व व्यापारियों आदि का भी जीवन काफी ज्यादा असुरक्षित हो गया है। उत्तर प्रदेश में भी लोगों की जबर्दस्त चाह कानून का बेहतर व सुरक्षित राज हो परन्तु यहाँ पूर्ण रूप से बीजेपी द्वारा बीजेपी का जंगलराज कायम हो गया है। स्वयं केंद्र सरकार के आँकड़े भी इन्हें मुँह चिढ़ाते हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराधों की बाढ़ है तथा सांप्रदायिक दंगे भी यहाँ सबसे ज्यादा हुये हैं, जो बीजेपी सरकार के दावों की पोल खोलते हैं। इतना ही नहीं बल्कि विकास भी केवल फर्जी व हवा-हवाई ही है और इसका जमीनी स्तर से कोई ज्यादा वास्ता नही है।

साथ ही महंगाई, बेरोजगारी व गरीबी भी, यहाँ की ध्वस्त कानून-व्यवस्था की तरह ही, पूरी तरह से बिलकुल ही बेकाबू है। सरकार युवाओं की रोजगार नही दे पा रही है जिस कारण उन पर पलायन करने का तनाव जारी है। लेकिन देश में कहीं भी रोजगार के अवसर उपलब्ध नही होने के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन और भी ज्यादा भयावह रूप धारण करती जा रही है। केंद्र व उत्तर प्रदेश में एक ही पार्टी का राज होने पर विशाल व रोजगार के नये अवसर उपलब्ध करने का दावा करने वाली बीजेपी के वरिष्ठ नेतागण अब अपना मुँह छिपाये फिर रहे हैं। उन लोगों के उत्तर प्रदेश में सरकार बना लेने के बाद प्रदेश की लगभग 22 करोड़ जनता के बीच सड़क पर बेआसरा व बेसहारा छोड़ दिया है, जिससे लोगों में काफी ज्यादा आक्रोश व्याप्त है।

 

और लोगों की इसी नाराजगी, बेचैनी व आक्रोश का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में व अभी हाल ही में हुये शहरी निकाय के चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी को यहाँ की जनता ने जबर्दस्त झटका दिया है। लेकिन इसके बाद भी बीजेपी सरकार की जातिवादी, साम्प्रदायिक व नफरत की संकीर्ण व नकारात्मक राजनीति जारी है। इतना ही नही बल्कि ये लोग अपने आपको कानून से ऊपर मानकर अपने ऊपर से आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की होड़ में लग गये हैं। अनेकों प्रकार के घृणित व गंभीर अपराधों में लिप्त ये नेतागण अपने आपको पाक-साफ़ होने का दावा करके अपने-अपने मुकदमें वापिस करवाने में व्यस्त हैं, जो बीजेपी के राज में कानून के राज से खुला खिलवाड़ नही तो और क्या है?

 

वैसे भी उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न बीजेपी-शासित राज्यों में बीजेपी नेताओं के लिये “सात खून माफ़” की गलत व गैर-क़ानूनी परम्परा चल पड़ी है और इस प्रकार सत्ता व कानून का घोर दुरूपयोग किया जा रहा है, लेकिन इससे आमजनता की परेशानी व समस्यायें दिन-दोगुनी रात चौगुनी बढ़ती ही जा रही हैं। और चूँकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की अब एन.डी.ए. की ना रहकर बीजेपी की सरकार भी कुछ इसी ही रंग में ढली हुई सरकार है, जिस कारण उत्तर प्रदेश सरकार को अब केंद्र सरकार का भी कोई खौफ नहीं रहा है, अर्थात जनहित व जनकल्याण के मामले में हर स्तर पर लापरवाही, उदासीनता, कर्तव्यहीनता बिना रोक-टोक जारी है। देश की अदालतें तो अब इनके लिये ऐसा लगता है जैसे कोई मायने ही नही रखती है। ऐसे मामलों में खासकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सरकार का रवैया बड़ा ही खतरनाक न्यायपालिका को नीचा दिखने वाला तथा देश को मायूस करने वाला है। श्री मोदी सरकार द्वारा कार्यपालिका में भी बार-बार के जबर्दस्ती के हस्तक्षेप से देश में चिंता की एक और लहर देखी जा सकती है।

 

सुश्री मायावती जी ने अपने संबोधन कहा कि लोकसभा आमचुनाव में अब ज्यादा समय नही बचा है। कुछ महीने में जल्द ही होने वाले कर्नाटक विधानसभा आमचुनाव के बाद इसी वर्ष खासकर बीजेपी-शासित ख़ास राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में विधानसभा के आमचुनाव से पूरा देश फिर लोकसभा आमचुनाव के माहौल में बदल जायेगा जब बीजेपी सरकार के दावे अर्धसत्य से असत्य में बदल जायेंगे और जनता उन पर थोडा भी शायद ही ध्यान देगी।

 

केंद्र में भी नरेंद्र मोदी सरकार के लगभग चार साल व इसी पार्टी के उत्तर प्रदेश में लगभग एक वर्ष में खासकर उत्तर प्रदेश जैसे काफी बड़ी जनसंख्या के साथ ही अति-पिछड़े व अत्यंत ही जरूरतमन्द राज्यों में हालात वायदों के मुताबिक बेहतर होने के बजाय बदतर ही होते चले जा रहे हैं तथा यहाँ की जनता अब और ज्यादा भ्रमित होकर बीजेपी के फरेब में आने को तैयार नही लगती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की भावुकता व उत्तर प्रदेश सरकार की भगवाकरण की राजनीति से प्रदेश की आमजनता का पेट नही भर पा रहा है और ना ही यहाँ के लोगों की गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी व महंगाई कम होकर उन्हें थोडा राहत ही दे पा रही है। लिहाजा आमजनता के पास “वोटबन्दी” का जो जबर्दस्त लोकतान्त्रिक हथियार है उसे वह बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

 

सुश्री मायावती जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की लगभग 22 करोड़ जनता, गुजरात की तरह ही, बीजेपी के खिलाफ मन बनाये हुये लगती है। यह खासकर नोटबन्दी के अपरिपक्व व नये जी.एस.टी. कर कानून की आर्थिक जख्मों से कराह रही है, फिर भी बीजेपी की केंद्र व राज्यों में इनकी सरकारें अनगिनत हवा-हवाई दावों से उनके जख्मों पर नमक छिड़कने से बाज नही आ रही हैं। बीजेपी सरकार की नीतियों शिक्षित बेरोजगारों को उनकी क्षमता व डिग्री के अनुसार नौकरी मुहैया कराने की कोशिश करने की ईमानदार कोशिश करने की बजाय उन्हें चाय व पकौड़ा बेचने के लिये मजबूर करना चाहती है और इसी लिये केवल ऐसे ही लोगों की गुणगान भी लगातार करती रहती है। क्या ऐसे ही भारत आगे बढ़ेगा व आयुष्मान होगा?

इसके आलावा संसद में विपक्ष की आवाज को हर प्रकार से दबाने के साथ-साथ संसद के बाहर उनके ऊपर अनेकों प्रकार के हतकण्डे अपनाकर अपनी कमियों व जिम्मेदारियों को छिपाने का प्रयास करने से क्या देश के सवासौ करोड़ लोगों की ज्वलन्त समस्यायें समाप्त हो जायेंगी?

 

बी.एस.पी. के लोगों से पूरी मिशनरी भावना से काम करके सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में प्राप्त करने का आह्वान करते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि बी.एस.पी. किसी भी दशा में ना तो पहले कांग्रेस से हर मानी है और ना ही वर्तमान में बीजेपी के साम, दाम, दण्ड भेद आदि हतकण्डों से हार मानने वाली है। इसने अपने संघर्ष व त्याग से परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर के कारवाँ को हमेशा आगे बढ़ाने का काम किया है ताकि भारत देश उनके सपनों का समतामूलक राष्ट्र बन सके।

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